.. धीमे से पास बैठा वो
कहां से इकट्ठा करना होता है, जहां से शुरू हुआ? या जहां का अंदेशा था कि ऐसा भी हो सकता है। ये ऐसा भी हो सकता है वाला अंदेशा बहुत कम यकीन के साथ आता है क्योंकि जब तक आप खुद को मनवा लेते हो कि असल खुशी कम देर ही टिकती है, तो ज्यादा मत सोच। लेकिन जब वो घटित होता है आप यकीन नहीं करते, उसे छूना चाहते हो, उसके उठने, बैठने , सांस लेने, सोने को महसूस करना चाहते हो। संभाल नहीं पाते खुद को.... खोए हुए रहते हो.... मेरा ये दौर खोए हुए रहने वाला ही दौर है। अभी तक ऐसे मसलों से मेरा कोई लेना देना नहीं था, ये अचानक धप्प से मेरे करीब आया है...खूबसूरत है... तो नज़र नहीं लगनी चाहिए। 🧿 वो लड़का कहानियों सा वो लड़की पहली सी.... वो मटर छीलता है और वो छिली मटर खा जाती है वो गुनगुनाता है वो सुनती है ... किताबें खूब महकती हैं फूलों से बातें जरा कम होती हैं उसकी बड़ी आंखे उसे हंसा देती हैं एक कुंवारी लड़की वाली हंसी देखी है? वो नजर मिलती है तो हंसना बंद हो जाता है वैसी ही हंसी हंसते हैं दोनों... दोनों सपने में हैं क्या? बताओ बताओ...